मेरी अधूरी कहानी

आर्यन भल्ला द्वारा

बिना किताबों के जो पढ़ाई की जाती है उसे जिंदगी कहते हैं ।
तो चलिए अब हम पढ़ते हैं कहानी एक बुलबुल जिंदगी की जो बनी मेरे घर पर ।..😊
मैं काफी दिनों के बाद कुछ लिख रहा हूं।✍✍ मुझे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी जुटाने में बहुत मजा आता है। साथ ही कई दिनों से एक बुलबुल मेरे घर पर आ रही थी । तो अब आप रोज के कुछ - कुछ पल उसके डायरी की तरह पढ़िए।👇👇👇

My Inspiration

कुछ नया करने या सोचने की इच्‍छा उत्‍पन्‍न करने वाला मनोभाव या उस व्‍यक्ति को कहते हैं - प्रेरणा।
इस बुलबुल की कहानी को लिखने की प्रेरणा दी मेरे स्कूल की विज्ञान पढ़ाने वाली शिक्षिका ने जिनका नाम है - निशा गुप्ता।
उन्होंने मुझे कहा कि बुलबुल जो भी करें उसकी सभी तस्वीरें संभाल कर रखना उन्होंने ही मुझे यह कहानी लिखने की प्रेरणा भी दी और अगर उन्होंने ऐसा ना किया होता तो मेरे दिमाग में यह नहीं आया होता । तो मेरी तरफ से उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद ।

दो बुलबुल की 1 जोड़ी ने हमारे पीछे वाले बरामदे के कड़ी पत्ता के पेड़ पर अपना घोंसला बनाने का फैसला किया । तो अब पढ़िए मेरी उत्सुकता और भावनाओं के बारे में। इस कहानी में रोमांचक पल , खुशी के पल , और दुखद पल भी हैं। तो चलिए अब देखते हैं । कैसे होगी इनकी यात्रा हमारे कड़ी पत्ते के पेड़ पर ?..
मुझे निशा मैम ने कहानी लिखने की प्रेरणा तो दे दी । परंतु , कहानी की शुरुआत करने के लिए एक अच्छी सी तस्वीर चाहिए थी । जो कि मुझे ना मिली तो फिर मुझे याद आया मेरे मम्मा के एक माननीय सर जिनका नाम है डॉक्टर पल्लव रे । उन्हें भी चिड़ियों की फोटो खींचने में बहुत मजा आता है। तो फिर मुझे उनकी यह तस्वीर याद आई और मैंने लगा दी। जैसा कि आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं ।

आजकल पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित हुई है। साथ ही कई देशों ने संपूर्ण लॉक डाउन का फैसला भी लिया है ।😕 सभी लोग घर पर बैठे-बैठे बोर हो गए हैं ।😐 परंतु , मुझे एक साथी जरूर मिल गया है । पढ़िए , उसकी कहानी वह मेरा साथी है - एक प्यारी सी बुलबुल 🐦 (रेड वेंटेड बुलबुल) लेकिन , मुझे क्या पता था कि - यह अपना घर बसाने मेरे घर ही आ जाएगी। मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूं कि - इस चिड़िया ने अपना घोंसला मेरे घर पर ही बनाने के बारे में सोचा ।😇😇
क्या आप जानते हैं?..
बुलबुल अपना घोंसला खंडर में या घरों के अंदर बनाती है या फिर अगर घरों में कोई पुराने लॉकर या फिर मीटर बॉक्स हो तो उस मैं भी अपना घोंसला बनाती है ।🏕🏕

• 19 अप्रैल 2020
रविवार, 1:02 दोपहर

उस दिन रविवार का दिन था । कड़ी धूप थी । जब मैं अपने बरामदे में पौधों को पानी दे रहा था । तभी मैंने देखा कि - एक प्यारी सी बुलबुल हमारे कड़ी पत्ता के पेड़ पर बैठी थी । लेकिन पत्तों के कारण मैं उसे ना देख सका , तो डर के कारण वह उड़ गई । फिर मुझे बहुत बुरा लगा और मैंने झट से उसकी तस्वीर खींच ली ।
मुझे लगा कि वह चिड़िया वापस जरूर आएगी । तो इस उम्मीद में मैंने वहां पर पानी पीने का बर्तन भी रख दिया । फिर मम्मा की मदद से हम दोनों ने इसका एक प्यारा सा नाम भी रखा। हमने इसका नाम रखा एलिसा , जिसका अर्थ होता है अंग्रेजी में - बहुत खुशी । यह नाम हमने इसीलिए इसे दिया क्योंकि इस महामारी करोना में इसने हमें बहुत खुशी दी ।🙂🙂
क्या आप जानते हैं?...
एलिसा का अर्थ होता है बहुत खुशी और यह पॉजिटिविटी का भी अर्थ है । साथ ही पॉजिटिविटी का अर्थ है - सकारात्मकता ।
शब्द बोलने में बड़ा कठिन है ना ।🤣🤣

• 20 अप्रैल 2020
सोमवार, 3 : 27 दोपहर

भरी दोपहर थी । शाम होने का समय था । अचानक ! से मुझे चिड़िया की आवाज आई । मैं पैरों को दबदबा🤫 कर धीमे-धीमे चला जा रहा था । मैंने जैसे ही नजर घुमाई वह चिड़िया वही कल वाली बुलबुल थी। कड़ी पत्ता के पेड़ में से झट से वह तार पर बैठ गई। मुझे लगा कि वह वापस आ जाएगी । परंतु , वह उड़ गई । मैं आशा लेकर बैठा था कि वह फिर जरूर आएगी परंतु वह ना आई।😔 फिर मैंने झट से उसकी तस्वीर खींच ली ।😉😉
क्या आप जानते हैं?..
बुलबुल का एक खुद का स्टाइल होता है इसके सर के बाल खड़े होते हैं और इसकी पूंछ भूरे रंग की होती है और भूरे रंग के पुंछ के नीचे लाल रंग का निशान होता है। जिससे यह जानी जाती है क्योंकि यही इसकी पहचान है । 😯😯

• 21 अप्रैल 2020
मंगलवार , 12:55 दोपहर

आज जो मैंने कड़ी पत्ता के पेड़ में देखा। वह देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया 😲और मैं फूला ना समाना😃 क्योंकि जो बुलबुल बार-बार आ रही थी । उसने अब अपना घर बनाने का फैसला हमारे कड़ी पत्ते के पेड़ पर करा। घोंसला बनाने के लिए उसने डाली के कुछ छोटे-छोटे तिनके का इस्तेमाल भी किया । फिर मैंने आगे क्या होगा ? उस पल के आने का इंतजार किया और उसने मेरी उम्मीद को झूठा नहीं ठहराया ।😯

उसने मेरी उम्मीद पर अमल भी किया 😊। उसने ची - ची कर मुझे बुलाया कुछ दाने खा कर और पानी पी कर चली गई । फिर पूरे दिन की भागदौड़ के बाद शायद उसने घर जाने का निर्णय लिया क्योंकि वह बार बार एक-एक तिनके को लेकर आती है । फिर अपने घोसले में उसे जोड़ती है । और वापस नया तिनका लेने चली जाती है
क्या आप जानते हैं?..
बुलबुल अपना घोंसला कप की शेप का बनाती है ।🤔🤔

• 22 अप्रैल 2020
बुधवार, 9 : 32 सुबह

सुबह उठते ही मैंने उसे देखा वह गुनगुना रही थी ।😍 एक ऊंची कड़ी पत्ते की डाल पर एलिसा अपने घोसले को देखकर उसमें आगे क्या करूं करने के बारे में सोच रही होगी (जैसा कि ऊपर दी हुई तस्वीर में देखा जा सकता है)। आज तो मैंने यह भी देखा कि आज तो दो-दो बुलबुल आई थी। एक कपड़े की तार पर बैठी हुई थी। जो की पहरेदारी कर रही थी और दूसरी घोंसला बनाने में जुटी हुई थी। शायद दूसरे वाला पिता ना हो 😎😎 यह किसी से भी दोस्ती करके आपस में मदद कर घोंसला बनाते हैं क्योंकि एकता में ही बल है। तो आपने यह गाना जरूर सुना होगा कि साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना । बुलबुल एक ऐसी चिड़िया है जो कि अपना घोंसला केवल शांति में ही बना सकती है। और मैं बहुत खुश हूं और उत्सुक हूं की कब अपना घोंसला पूरा कर उसमें अंडे दे और उसमें से दो छोटे-छोटे बुलबुल के बच्चे निकले। लेकिन अभी इतनी दूर जाने की बारे में नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि अगर नजर हटी तो दुर्घटना घटी।🙄🙄
क्या आप जानते हैं ?..
बुलबुल 1 दिन में केवल एक ही अंडा देती है । परंतु , उसके अंडों का ग्रुप दो या तीन अंडो का हो सकता है ।🤔🤔

23 अप्रैल 2020
गुरुवार, 11 : 50 सुबह

देर रात में बुलबुल के घोसले के बारे में जानकारी जुटाने लग पड़ा। मुझे नेट से काफी सारी चीजें पता चली। बुलबुल अपना घोंसला केवल जून से सितंबर के बीच में गर्मियों में ही बनाती है। 🥵 साथ ही यह अंडे दो से तीन देती है और अपना👣 घोंसला 2 से 3 मीटर लंबे चौड़े पेड़ पर बनाती है। प्रकृति भी कितनी अच्छी है उन्होंने इन जानवरों को कितनी अच्छी क्षमता दी है कि वह घोसला बनाएं और उन में अंडे देकर उड़ जाएं। आप भी पेड़ पौधे लगाएं ताकि कभी आपके भी घर पर कोई चिड़िया घोंसला बनाने के बारे में सोचे इसलिए पेड़ लगाओ धरती बचाओ।...🌏🌏
अंकल और आंटी बहुत मेहनत करते हैं अपने बच्चों के लिए ।
मेरा अंकल मतलब पिता बुलबुल और आंटी मतलब माता बुलबुल। वह दोनों तिनके इकट्ठे कर कर - कर घोसला अब एक कप की शेप का बना रहे हैं । पहले वह दोनों दिन में बहुत कम आते थे । केवल तीन से चार बार लेकिन अब छे से सात बार आते हैं और नेट के हिसाब से इन्हें घोंसला बनाने में 11 दिन और लगेंगे। बुलबुल भी बिचारी बोलती होगी। अंकल को - " चलो - चलो अभी आराम मत करो अभी हमें घोंसला और आगे बनाना है !.."
लेकिन अंकल कहते होंगे आंटी से कि - "थोड़ा आराम भी कर लो इतना काम भी अच्छा नहीं ..।" और ऐसे शायद इन दोनों में झगड़ा भी होता हो क्योंकि कल्पनाएं और भावनाएं जानवरों में होते हैं।🥰🥰

आज शाम को जब वह आई । मैंने सोचा इसकी 2 या 4 तस्वीरें खींच लूंगा । परंतु , मुझे क्या पता था की तस्वीरें खींचने के चक्कर में यह तो डर जाएगी । डर के मारे वह एक तार पर जाकर बैठ गई । (जैसा की तस्वीर में आप देख सकते हैं ) तो अब मैंने यह निर्णय लिया कि - अब मैं बार-बार पीछे कड़ी पत्ते के पेड़ के पास नहीं जाऊंगा क्योंकि अगर यह डर गई और उसने घोसला ऐसे ही छोड़ दीया । फिर तो बहुत बुरा होगा इसलिए पहले मैं इसे घोंसला ही बनाने दूंगा फिर ही देखने जाया करूंगा । जबसे यह बुलबुल आई है , तब से मुझे बहुत फायदा हुआ है । मैंने कंप्यूटर और मोबाइल देखना बहुत कम कर दिया है । तो अब आप खुद ही सोचिए एक चिड़िया की वजह से मुझे बहुत फायदा हुआ ।
लेकिन उत्सुकता के कारण मेरा मन बार-बार बुलबुल को देखने का करता है और मुझे लगता है कि - क्या उसने घोंसला पूरा कर लिया होगा क्योंकि वह हर 15 मिनट बाद आती है ?.. लेकिन आज उसने बड़े सुंदर - सुंदर गीत गाय ।
क्या आप जानते हैं?..
बुलबुल एक ऐसी चिड़िया है जो अपने मधुर गीत के लिए भी बहुत जानी जाती हैं। साथ यह है दिन में कम रात में ज्यादा गीत गाती है ।🐦🐦

• 24 अप्रैल 2020
शुक्रवार , 6 : 43 सुबह

जैसे ही सूरज ने उठने का फैसला किया । उससे पहले ही दोनों माता पिता घोंसला बनाने के लिए आ गए । इन की आवाज से मेरी नींद खुली तो मैं लगभग 7 बजे तक देखता रहा कि - आज इन्होंने क्या करा ? साथ ही अब इन्होंने अपना घोंसला बहुत अच्छा बना लिया है । पहले तो मैं फिर भी इन्हें खिड़की से देख पाता था । लेकिन अब घोंसला इतना बड़ा बन गया है कि - इन्हें देखना भी बहुत मुश्किल हो जाता है । तो रसोई की तरफ से जो दरवाजा है वहां से देखना पड़ता है । यही प्रकृति की रीत है और आज इन दोनों ने इतनी मेहनत करी की थक कर बेचारे आराम से बैठ गए । (जैसा कि आप ऊपर दी हुई तस्वीर में देख सकते हैं )👆👆 आज तो पक्का आंटी ने कहा होगा अंकल से कइ - "चलो अब तुम इतनी जिद कर ही रहे हो तो कुछ पल आराम से बातें ही कर ले..।" अब तो यह तिनका इकट्ठा करने की बजाय बुलबुल अब घोसले में बैठकर यह देखती है कि क्या इसमें मेरे बच्चे आ पाएंगे । यह दोनों आराम का नाम तब तक नहीं लेंगे जब तक अपने बच्चों को उड़ान एक नई जिंदगी की नहीं देंगे इन दोनों ने यह बात गांठ बांधकर याद रखनी है कि - जब तक काम ना पूर्ण होगा तब तक नाम नहीं विश्राम का ।
क्या आप जानते हैं?..🤔🤔
चिड़ियों में भी पति पत्नी होते हैं उनमें भी रिश्ते होते हैं ।..👫

• 25 अप्रैल 2020
शनिवार , 12:30 दोपहर

जब मुझे यह लगा की बुलबुल को अब मुझ से डर लगता है 🤨🤨। तो मैंने कड़ी पत्ते के पेड़ के पास जाना छोड़ दिया । परंतु , जब मुझे समय मिला तो मैं पीछे गया और मैंने घोसला देखा और जैसा कि आप इस ऊपर दी हुई तस्वीर में देख सकते हैं । अब घोसला बहुत बड़ा और सुंदर बन गया है😀 । लेकिन इसके नीचे बिल्कुल भी तिनके नहीं है 😕 परंतु , बुलबुल ने अपने थूक से तिनका - तिनका आपस में जोड़ दिया । वैसे तो अक्सर बुलबुल 4 : 00 बजे के बाद नहीं आती थी । लेकिन अब अंडे देने का समय हो रहा है । तो इसलिए अब यह 5 : 00 बजे के बाद तक घोंसला ही बनाती रहती है । लेकिन शायद अभी भी पूरा करने में घोसला समय लगे क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है ।😝😝😝
क्या आप जानते हैं?..
एक चिड़िया का घोंसला बनाने में 14 दिन लगते हैं ।🥱

26 अप्रैल 2020
रविवार , 7 : 12 सुबह

आज बुलबुल को आते हुए एक हफ्ता हो गया है क्योंकि यह पिछले रविवार ही तो आई थी 😮😮 । आज बहुत तेज हवाओं के साथ धीमी बारिश भी हुई ☔☔ परंतु, इसके घोसले को कुछ नहीं हुआ । नेट के हिसाब से शायद इसे घोंसला बनाने में एक हफ्ता और लगे । 😗
लेकिन आज तो मैंने एक और चीज पर गौर किया । मैंने देखा कि जब भी मादा बुलबुल तिनका लेकर आती है तो वह घोसले में उसे जोड़ना शुरु कर देती है । परंतु, उसी के साथ ऊपर टीवी की डिश पर बैठी हुई बुलबुल भी उसे देखती रहती है कि क्या उसे कोई खतरा तो नहीं तो इस तरह यह दोनों एक दूसरे की मदद करते रहते हैं ।👏👏👏
क्या आप जानते हैं ??...
बुलबुल के उसके सिरे का रंग सफेद होता है ।🐦🐦

• 28 अप्रैल 2020
मंगलवार , 4 : 17 शाम

आज मुझे समझ नहीं आया जो मैंने खुद देखा 🤔 क्योंकि आज दोनों बुलबुल अंकल - आंटी दोपहर को 1 बजे के बाद नहीं आए । तो मुझे लगा कि कहीं मेरे प्रयोग के कारण तो ऐसा नहीं हो गया । मैं आज दोपहर को आराम से Crax खा रहा था । तो उसमें से एक खिलौना निकला । परंतु , वह खिलौना मुझे पसंद ना आया और वह खिलौने एक छोटी सी प्लास्टिक की गेंद थी । तो मैंने सोचा क्यों ना एक प्रयोग किया जाए । जैसे कोयल कौवे के साथ करती है । वह अपने अंडे कौवे के घोंसले में रख आती है । तो फिर वह गेंद मैंने बुलबुल के घोसले में रख दी । जिससे वह समझे कि यह इसका अंडा है । परंतु , फिर मैंने सोचा कि अगर यह डर गई या कुछ और हो गया तो मैं क्या करूंगा ??.. फिर मैंने फटाफट से उस गेंद को वहां से हटा दिया । तो जबसे मैंने गेंद रखी है । तब से बुलबुल वापस नहीं आई । तो शायद कहीं इसको मेरे हाथों की सुगंध ना आ गई हो । तो मैं थोड़ा चिंता में पड़ गया कि क्या इन्होंने घोसला तो नहीं छोड़ दिया??..😥😥

• 29 अप्रैल 2020
बुधवार , 5 : 46 शाम

मुझे सुबह पापा ने कहा कि -"बेटा चिड़िया नहीं आई ।.." तो मैं हैरान रह गया क्योंकि कल भी यह दोपहर के 1 बजे के बाद नहीं आई और अब सुबह भी नहीं आई l बल्कि , सुबह तो यह ज्यादा चक्कर लगाती थी । तो मैं थोड़ा उदास हो गया । फिर मुझे पछतावा हुआ और मैंने सोचा कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था । मेरे प्रयोग के कारण अब बुलबुल नाराज हो गई है और नहीं आ रही है फिर मुझे मम्मा की बात याद आई । उन्होंने मुझे बताया था कि - अगर एक बार कोई चिड़िया घोंसला बनाने की जगह चुन ले । तो वह दृढ़ निश्चय कर लेती है और वहीं पर घोंसला बनाती है । फिर उसके बाद माता - पिता तो ऑफिस चले गए । परंतु , बुलबुल नहीं आई लेकिन फिर लगभग 12 बजे दोपहर को मुझे उसकी आवाज आई । मैं फटाफट दौड़कर रसोई के दरवाजे से देखता रहा । लेकिन अब वह अपने मुंह में तिनका लेकर नहीं आती । बल्कि , यह तो घोसले में लगभग बीस - बीस मिनट यूं ही बैठी रहती है

। तो शायद इसका संकेत यह भी हो सकता है कि - यह कहीं अंडा ना दे रही हो ।😍😍

आज तो गजब ही हो गया । आज जब मैं शाम को पौधों में पानी दे रहा था । तो जैसे ही मैंने पीछे मुड़कर देखा । बुलबुल बैठी हुई थी तार पर (जैसा कि आप ऊपर दी गई तस्वीर में देख सकते हैं ) फिर मैंने थोड़ी घोंसले पर भी नजर डाली तब बुलबुल वहां नहीं बैठी थी और मुझे कुछ गोल - गोल दिखाई दिया । तो फिर मुझे लगा कि बुलबुल ने अंडा दिया होगा तो जब मैंने उसकी पहले तस्वीर खींची तो उसमें कुछ गोल जरूर दिखाई दिया था पर ना ही पापा ने मेरा समर्थन किया ना ही मां ने । तो फिर मैंने उसकी और एक अच्छी तस्वीर खींचने का फैसला किया और मुझे यकीन था कि बुलबुल ने अंडा जरूर दे दिया होगा । परंतु , मुझे लगा कि वह कोई तिनका होगा ।

लेकिन मुझे शक तो था कि कहीं अंडा ना बुलबुल ने दे दिया हो क्योंकि ना ही वह आज तिनके लेकर आई और आज वह घोसले में काफी देर बैठी रही । साथ ही आज पहली बार शाम को इतनी देर तक बैठी । तो जब बुलबुल वापस उड़ गई । तो मैंने घोसले मैं देखा और जो मैंने देखा वह देखकर मैं खुशी से पागल हो गया 😆 और मेरी खुशी का कुछ ठिकाना रहा 😂😂 क्योंकि इतने दिनों के लिए जिसका मैं इंतजार कर रहा था । वह चीज आज बुलबुल ने दे ही दी । उसने अपने बच्चे का एक अंडा दे दिया है । वैसे तो नेट के हिसाब से अंडा देने में लगभग 14 दिन लगने थे । लेकिन अब इसने आज केवल 10 दिनों में ही अंडा दे दिया है । तो नेट के हिसाब से यह कल भी एक अंडा देगी और अब इन दोनों अंकल - आंटी की जिम्मेदारी भी बहुत बढ़ जाएगी । साथ ही मुझे और मेरे परिवार वासियों को भी अंडे पर नजर रखनी होगी ताकि कोई बड़ा जीव अंडे को ना खाले जैसे कि - बिल्ली । लेकिन उस के ज्यादा पास नहीं जाना । तो चलिए अब हम उसका इंतजार करते हैं ।
क्या आप जानते हैं ??..
बुलबुल का अंडा थोड़ा सफेद और थोड़ा गुलाबी रंग का होता है । ( जैसा कि आप ऊपर दी हुई तस्वीर में देख सकते हैं ) परंतु, अंडे पर लाल और गुलाबी रंग की बिंदिया होती हैं ।🐥🐥

• 30 अप्रैल 2020
गुरुवार, 1:04 दोपहर

अब तो बुलबुल अंडों पर ही बैठी रहती है । तो जब बुलबुल उन पर बैठती है । तो अंडों में गर्मी होती है । जिस कारण उसमें से उसके बच्चे जल्दी निकल जाते हैं । अब तो बुलबुल हम से नहीं डरती क्योंकि उसके पास अब और कोई चारा भी नहीं क्योंकि वह अपना नया घोंसला नहीं बना सकती है । और उसने अपने अंडे भी दे दिए हैं । तो जब भी हम कड़ी पत्ते के पेड़ के पास जाते हैं । उस को हमसे बिल्कुल भी डर नहीं लगता । वह चुपचाप बैठी रहती है । अब तो शायद इसमें दो अंडे दे दिए होंगे क्योंकि नेट के हिसाब से यह अगले दिन दूसरा अंडा दे देती है । परंतु, यह अब फोटो ही नहीं खींचने देती और
अब तो जब भी हम कड़ी पत्ते के पेड़ के पास जाते हैं । तो दोनों अंकल - आंटी फटाफट अपने पंख फैलाकर तार पर बैठ जाते हैं कि - यह कहीं मेरे अंडों को कुछ कर तो नहीं रहे । तो फिर शायद आंटी अंकल से कहती होगी - " अजी सुनते हैं । नीचे अंडों पर ध्यान रखना ।.."🤣🤣

• 1 मई 2020
शनिवार , 7:55 शाम

अब तो बुलबुल अपने घोंसले के पास किसी को पर भी नहीं मारने देती । अब ज्यादातर अपने घोंसले पर ही बैठी रहती है और अपने अंडों को ही देखती रहती है । आज उसने तीसरा अंडा दे दिया है । जो कि पापा ने देखा था । लेकिन वह उन अंडों की फोटो नहीं खींचने देती । जैसे ही फोटो खींचते हैं वह गोली की तरह झट से तार पर बैठकर देखती है कि कहीं मेरे अंडों को कुछ हुआ तो नहीं ??.. साथ ही आज तो इसने पापा पर हमला भी कर दिया । वह अपनी चोंच मारने पापा के मुंह पर आई थी । लेकिन पापा बच गए और पापा ने मुझे सचेत कर दिया है कि बार-बार उसके पास मत जा क्योंकि अब वह गुस्से में है और जब भी मैं उसके बहुत ज्यादा नजदीक जाता हूं । तो वह उड़कर अपने पति के पास जाकर शायद शिकायत करती होगी - "अजी सुनिए ना वह लड़का हट ही नहीं रहा है । जरा आप भी कुछ कहिए ना ।.." (जैसा कि आप ऊपर दी हुई तस्वीर में देख सकते हैं) अब तो रात भर भी यह अपने अंडों के ऊपर ही सोती है ।

• 2 मई 2020
शनिवार , 1:01 दोपहर

क्या आप जानते हैं ? बुलबुल के अपने अंडों पर निगरानी रखने के लिए कई सारे ठिकाने और गुप्त स्थान भी हैं ।

साथ ही यह हर समय अपनी इन जगहों से रखवाली के साथ-साथ चौकन्ना भी रहते हैं । निम्नलिखित बुलबुल की निगरानी के स्थान हैं -:

1. टीवी की डिश

सबसे पहली जगह है कड़ी पत्ते के बिल्कुल पीछे वाले घर कि टीवी की डिश । वह इनकी सबसे लोकप्रिय जगह है जहां से यह अपने अंडों पर नजर रखती हैं तथा मै या मेरे परिवार में से कोई भी सदस्य अगर

किसी काम के लिए पीछे जाते हैं तो यह झट से उड़कर कड़ी पत्ते के पेड़ की डाल पर बैठ जाती है ।

2. लंबी तार

हमारे कड़ी पत्ते के पेड़ से उत्तरी दिशा में एक लंबी सी तार है । ज्यादातर ये दोनों वहां नहीं बैठते लेकिन शाम के 5 बजे के बाद यह वही से निगरानी करते हैं और शाम को जब कभी भी हम पानी की मोटर चलाने जाते हैं । तो यह दोनों झट से कड़ी पत्ते की तार पर बैठ जाती हैं । (जैसा कि आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं )

3. हमारे मकान की पहली मंजिल की बालकनी

फिर जब हम कभी-कभी घोसले की कुछ ज्यादा ही नजदीक चले जाते हैं । तो यह उड़कर बालकनी की दीवार पर भी बैठ जाती है । ताकि यह शोर मचा कर अपने पति को बुला सके ।

4. कड़ी पत्ते के सामने वाले घर की दीवार

साथ ही आखिरी और चौथी जगह जो मैंने अपनी आंखों से देखी हैnl वह है हमारे कड़ी पत्ते के सामने वाले घर की दीवार । जिस घर पर टीवी की डिश भी है । कभी-कभी यह दोनों वहां पर भी आपस में बातें और समय बिताते नजर आते हैं ।

आज दोपहर को जब दोनों बुलबुल नहीं थी तब मैंने फटाफट से घोसले ले में फोन डालकर इन अंडों की फोटो खींच ली। मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी इन अंडों की तस्वीर खींचने के लिए । अब इसमें सारे अंडे दे दिए हैं वैसे तो यह तीसरा अंडा 1 मई को ही दे दिया होगा । परंतु , मुझे बुलबुल इन अंडों की फोटो भी नहीं खींचने देती थी । तो यह फोटो मैंने आज की खींची है । जैसा कि आप ऊपर दी गई तस्वीर में देख सकते हैं । यह तीनों अंडे बहुत प्यारे लगते हैं । साथ ही अगर बुलबुल इन पर लगातार बैठती रही । तो इनमें से बहुत ही जल्दी इसके बच्चे बाहर निकल जाएंगे और उनका इस दुनिया में जन्म होगा ।

यह बुलबुल की पूंछ की तस्वीर है इसकी पूंछ का सिरा सफेद है । यह रात में भी अपने अंडों की रखवाली करती है l यह उन पर सारी रात सो जाती है l

• 3 मई 2020
रविवार , 8:36 रात

आज बुलबुल को कड़ी पत्ते के पेड़ पर रहते हुए पूरे 3 हफ्ते हो गए हैं और अब तक इसकी यात्रा यहां तक बहुत खूबसूरत हुई । परंतु, आज बहुत बुरा हुआ । आज जो दृश्य बुलबुल, मैंने और मेरी मम्मा ने देखा वह बहुत खतरनाक और डरा देने वाला था । आज अगर मम्मा और मैं कड़ी पत्ते के पेड़ के पास ना होते तो फिर बुलबुल के अंडों को कुछ भी हो सकता था । जब मम्मा और मैं पीछे सूखे कपड़े उठाने गए । तभी जोर से बुलबुल ने शोर मचाना शुरु कर दिया और तभी एक बिल्ली हमारी पड़ोसियों के दीवार से आ रही थी । इससे पहले उसकी नजर अंडों पे पड़ती उससे पहले मम्मा और मैंने उसे भगा दिया । परंतु, हमें शक तो था कि कहीं वह वापिस ना आ जाए । लेकिन अच्छा ही हुआ की वह वापिस ना आई । फिर रात को 8 बजे के बाद मौसम बहुत खराब हो गया और इसे बहुत सारी मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा । रात को बहुत तेज आंधी आई उसके बाद काफी तेज बारिश भी शुरू हो गई थी । परंतु , यह अपने घोंसले से बिल्कुल भी ना हिली और इसने अपने अंडों को भी बचा लिया ।
इसी को कहते है मां , जो कि खुद अपनी बच्चों की रक्षा कर ने के लिए सारी रात बारिश में भीगती रही ।

6 मई 2020 बुधवार,
7: 31 सुबह

सुबह मैं जब आराम से सो रहा था । तभी अचानक ! मेरे पापा मेरे पास फोन में एक तस्वीर लेकर आए और वह तस्वीर देख कर मैं चौक गया और बहुत उदास हो गया।

अगर आप इस ऊपर दी गई तस्वीर को देखेंगे तो आपके भी होश उड़ जाएंगे क्योंकि उस तस्वीर में बुलबुल के अंडे नहीं थे और एक अंडे का छिलका पड़ा था । जो कि शायद बिल्ली ने खा लिए थे और हमने बुलबुल के बच्चों को खो दिया। बुलबुल बेचारी बहुत बार घोसले में आई और करुण स्वर में विलाप कर रही थी और चारों और अपने अंडो को ढूंढ रही थी । परंतु , हम भी कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि यही बिल्ली का खाना है ।

बेचारी बुलबुल शाम के 6 बजे तक आकर घोसले में झांकती रही कि कहीं मेरे अंडे तो नहीं आ गए । परंतु , उस बेचारी को क्या पता? यह कभी नहीं आएंगे ।😭😭😭😭

और आज मुझे मन्ना डे का एक बहुत पुराना गीत याद आता है। वह गीत है - ‘जिंदगी कैसी है पहेली हाय कभी यह हसाए कभी यह रुलाए।’ बुलबुल के अंडे तो चले गए । परंतु , बुलबुल ने हमें एक सीख दी कि लगातार मेहनत करते रहो। जो अपना घोंसला उसने दो हफ्तों में बना लिया ।शवह हम इंसान 3 हफ्ते लगाकर भी नहीं बना सकते । मेरी यह कहानी अधूरी रह गई इसलिए मैंने इस कहानी का शीर्षक दिया। मेरी अधूरी कहानी जो बनी मेरे कड़ी पत्ते के पेड़ पर।🎄🎄

आर्यन भल्ला द्वारा बुलबुल कि अधूरी कहानी ……😶

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